शुरुआती लोगों के लिए इंटरवल ट्रेनिंग: कसरत और आराम का तालमेल
अपनी पहली इंटरवल कसरत की योजना बनाना सीखें: कसरत और आराम का समय चुनें, टाइमर सेट करें, तीव्रता सँभालें और धीरे-धीरे आगे बढ़ें।

इंटरवल ट्रेनिंग में कसरत और रिकवरी के दौर बार-बार दोहराए जाते हैं। मसलन, आप 30 सेकंड तेज़ चल सकते हैं, फिर एक मिनट धीमे चलकर यही क्रम कई बार दोहरा सकते हैं। इंटरवल का इस्तेमाल दौड़ने, पैदल चलने, साइकिल चलाने, तैराकी, ताकत बढ़ाने वाली कसरत या घर पर बिना किसी उपकरण के व्यायाम में किया जा सकता है।
शुरुआत करने वालों को पहले ही दिन पूरी रफ़्तार पकड़ने की ज़रूरत नहीं है। मेहनत का ऐसा स्तर चुनें जिस पर आख़िरी राउंड तक सही तकनीक बनी रहे और अगला राउंड शुरू करने से पहले पर्याप्त आराम मिल जाए। सुविधाजनक इंटरवल टाइमर समय का हिसाब रखता है, इसलिए आपको बार-बार घड़ी देखने या मन ही मन सेकंड गिनने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
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इंटरवल ट्रेनिंग कैसे काम करती है
एक इंटरवल के दो मुख्य हिस्से होते हैं:
- कसरत का समय: वह अवधि जिसमें आप रफ़्तार बढ़ाते हैं या अपनी चुनी हुई तीव्रता पर कोई व्यायाम करते हैं;
- रिकवरी: अगली कसरत से पहले आराम या हल्की गतिविधि की अवधि।
कसरत और आराम की एक जोड़ी से एक राउंड बनता है। कई राउंड मिलकर कसरत का मुख्य ब्लॉक बनाते हैं। इससे पहले वार्म-अप और बाद में हल्का कूल-डाउन भी चाहिए। इस तरह एक सामान्य सत्र में वार्म-अप, एक जैसे कई राउंड और कूल-डाउन होते हैं।
इंटरवल ट्रेनिंग का बहुत तेज़ होना ज़रूरी नहीं। तेज़ और आराम की चाल को बारी-बारी अपनाना भी इसी सिद्धांत पर चलता है। पहले से तय योजना के अनुसार मेहनत का स्तर बदलना ही इस प्रारूप की पहचान है।
जब मनचाही रफ़्तार पर बिना रुके चलना मुश्किल हो, तब इंटरवल खास तौर पर उपयोगी होते हैं। लगातार दस मिनट दौड़ने के बजाय आप बीच-बीच में चलकर कई छोटी दौड़ पूरी कर सकते हैं। कसरत के दौर आपको रफ़्तार का अभ्यास देते हैं और रिकवरी उस गतिविधि को संभालने लायक बनाए रखती है।
कसरत और आराम का समय कैसे चुनें
इंटरवल की अवधि व्यायाम, रफ़्तार और आपकी मौजूदा फ़िटनेस पर निर्भर करती है। तीस सेकंड सीढ़ियाँ चढ़ना और तीस सेकंड स्क्वॉट करना शरीर पर एक जैसा असर नहीं डालते, इसलिए हर गतिविधि के लिए कोई एक अनुपात सही नहीं होता।
पहली कसरत में आराम का समय कसरत से लंबा रखना ठीक रहता है। शुरुआत के लिए 20–30 सेकंड कसरत और उसके बाद 40–60 सेकंड आराम व्यावहारिक है। व्यायाम और अपनी स्थिति के मुताबिक इन अनुमानित समयों को बदलें। अगर साँस सामान्य नहीं हो रही या तकनीक बिगड़ने लगी है, तो कसरत का समय घटाएँ, आराम बढ़ाएँ या आसान व्यायाम चुनें।
रिकवरी निष्क्रिय या सक्रिय हो सकती है। निष्क्रिय रिकवरी में आप अगले राउंड से पहले खड़े रहते हैं, बैठते हैं या अपनी स्थिति बदलते हैं। सक्रिय रिकवरी में हल्की गति से चलते रहते हैं: दौड़ने से पैदल चलने पर आ जाएँ, पैडल धीमे चलाएँ या एक ही जगह आराम से कदम लें। चलने और साइकिल चलाने जैसी लगातार होने वाली गतिविधियों में सक्रिय रिकवरी अक्सर अधिक सहज लगती है, क्योंकि आपको अचानक रुकना नहीं पड़ता।
केवल पहले दो राउंड देखकर योजना को सही न मान लें। शुरुआत में पर्याप्त लगने वाला आराम, थकान बढ़ने पर छोटा पड़ सकता है और कसरत के बीच में रफ़्तार तेज़ी से गिर सकती है। शुरुआती लोगों के लिए सही योजना वह है जिसमें टाइमर से होड़ लगाए बिना और तकनीक बिगाड़े बिना हर दोहराव पूरा हो सके।
सही तीव्रता कैसे पहचानें
हर कसरत के दौरान पूरी ताकत झोंकने के बजाय थोड़ी क्षमता बचाकर रखें। साँस तेज़ होनी चाहिए और लंबे वाक्य बोलना मुश्किल लगना चाहिए, लेकिन गतिविधि नियंत्रण में रहनी चाहिए। रिकवरी के दौरान साँस धीरे-धीरे सामान्य हो जाए और अगले संकेत तक आप व्यायाम दोहराने के लिए तैयार हों।
ये तीन आसान संकेत बताते हैं कि तीव्रता बहुत अधिक है:
- कुछ ही दोहराव के बाद चुनी हुई रफ़्तार कायम नहीं रहती;
- रफ़्तार बनाए रखने के लिए गति का दायरा घटाना या तकनीक से समझौता करना पड़ता है;
- रिकवरी इतनी कम है कि आप दोबारा भरोसे के साथ चल नहीं पाते।
सिर्फ़ योजना में लिखे अंकों की खातिर इसे सहते रहने की ज़रूरत नहीं है। रफ़्तार घटाएँ, गतिविधि आसान करें या रिकवरी बढ़ाएँ, जब तक हर दोहराव फिर से नियंत्रण में न आ जाए।
ताकत बढ़ाने वाले व्यायामों के लिए एक और उपयोगी कसौटी है: कसरत का समय इतना होना चाहिए कि हर दोहराव बिना झटके के पूरा हो। अगर आख़िरी कुछ सेकंड किसी भी तरह ज़्यादा से ज़्यादा दोहराव ठूँसने की कोशिश बन जाएँ, तो गिनती छोड़कर स्थिर गति पर लौट आएँ।
अपना पहला सत्र कैसे बनाएँ
कुछ मिनट हल्की गतिविधि से शुरू करें और धीरे-धीरे मुख्य कसरत की रफ़्तार के करीब पहुँचें। पैदल चल रहे हैं तो आराम की चाल से शुरुआत करें और वार्म-अप के अंत तक रफ़्तार थोड़ी बढ़ा लें। घर पर सर्किट करने से पहले कम गहराई वाले आराम से किए गए स्क्वॉट, हाथों की हरकतें, कदम और आगे किए जाने वाले व्यायामों के आसान रूप आज़माएँ।
कसरत के पहले ब्लॉक में छह राउंड हो सकते हैं:
- मध्यम रूप से तेज़ गति पर 30 सेकंड कसरत करें।
- 60 सेकंड रिकवरी करें।
- इस जोड़ी को छह बार दोहराएँ।
वार्म-अप और कूल-डाउन मिलाकर यह एक छोटा सत्र बनता है, जिसकी सेटिंग का बाद में आकलन करना आसान है। अगर छठा राउंड लगभग पहले जितना ही स्थिर लगा, तो अगली बार वही योजना दोहरा सकते हैं। एक सत्र अच्छा होने भर से तुरंत आराम घटाने का लाइसेंस नहीं मिल जाता।
मुख्य ब्लॉक के बाद कुछ मिनट हल्के ढंग से चलते रहें। American Heart Association वार्म-अप के दौरान मेहनत धीरे-धीरे बढ़ाने और मुख्य गतिविधि के बाद उसे धीरे-धीरे घटाने की सलाह देता है। तेज़ दर्द, चक्कर या तबीयत में असामान्य गिरावट महसूस हो तो कसरत रोक दें। अगर कोई पुरानी बीमारी, हाल की चोट या चिकित्सकीय पाबंदी है, तो शुरू करने से पहले डॉक्टर से इस प्रारूप और तीव्रता पर बात करें।
शुरुआती लोगों के लिए तीन आसान योजनाएँ
पहले से तैयार योजना कुछ फैसले आसान कर देती है, फिर भी उसे अपने मुताबिक ढालना होगा। हर उदाहरण में कसरत का अर्थ है भरोसे के साथ मेहनत करना और थोड़ी क्षमता बचाकर रखना, न कि सबसे तेज़ रफ़्तार पकड़ना।
पैदल चलने के इंटरवल
वार्म-अप के बाद 30 सेकंड तेज़ और 60 सेकंड आराम की चाल से बारी-बारी चलें। 6–8 राउंड पूरे करके धीरे-धीरे रफ़्तार घटाएँ। रास्ते में चढ़ाई हो तो रफ़्तार और मेहनत का स्तर, दोनों बिल्कुल एक जैसे रखने की कोशिश न करें; चढ़ाई खुद ही भार बढ़ा देती है।
चलने के विराम के साथ दौड़ना
20 सेकंड हल्की दौड़ और 60–90 सेकंड पैदल चलना बारी-बारी करें। 5–6 राउंड से शुरुआत करें। दौड़ने की रफ़्तार ऐसी होनी चाहिए कि ब्लॉक के अंत में भी पैर रखने और धड़ सँभालने पर उतना ही नियंत्रण रहे जितना शुरुआत में था। ऐसा न हो पाए तो दौड़ का समय घटाएँ या उसकी जगह तेज़ चलें।
घर पर सर्किट
दो जाने-पहचाने व्यायाम चुनें, जैसे आरामदायक गहराई तक स्क्वॉट और दीवार के सहारे पुश-अप। पहला व्यायाम 20 सेकंड करें, 40 सेकंड आराम करें, फिर इसी तरह दूसरा व्यायाम करें। पूरा सर्किट 3–4 बार दोहराएँ। नई या तकनीकी रूप से कठिन गतिविधि को इंटरवल में जोड़ने से पहले बिना समय सीमा के सीखें।
इंटरवल टाइमर क्यों इस्तेमाल करें
सामान्य स्टॉपवॉच कुल समय दिखाती है, लेकिन हर अवधि की शुरुआत और अंत आपको खुद दर्ज करना पड़ता है। इंटरवल टाइमर कसरत और आराम के बीच अपने-आप बदलता है, संकेत देता है और राउंड गिनता है। बार-बार स्क्रीन देखने के बजाय आप सड़क पर नज़र रख सकते हैं, शरीर की स्थिति पर ध्यान दे सकते हैं या मशीन पर हाथ टिकाए रख सकते हैं।
शुरू करने से पहले ये सेट करें:
- पहले राउंड से पहले तैयारी का समय;
- कसरत की अवधि;
- आराम की अवधि;
- राउंड की संख्या;
- ज़रूरत हो तो ब्लॉक की संख्या और उनके बीच का विराम।
कसरत से पहले आवाज़ और संकेत जाँच लें। भीड़भरे जिम में संकेत दब सकता है, जबकि बाहर हेडफ़ोन लगाने पर ट्रैफ़िक और आसपास के लोगों की आवाज़ सुनाई देना बंद नहीं होना चाहिए। फ़ोन को सुरक्षित रखें या ऐसी जगह रखें जहाँ टाइमर रोकने के लिए व्यायाम के बीच हाथ न बढ़ाना पड़े।
आप Sveox वेब ऐप में कसरत सेट कर सकते हैं। अगर फ़ोन से टाइमर शुरू करना पसंद है, तो Google Play पर Android ऐप उपलब्ध है। एक आसान योजना सहेजें और उसे कई बार दोहराएँ। इससे समझना आसान होगा कि कसरत और आराम का संतुलन आपके लिए सही है या नहीं।
इंटरवल को धीरे-धीरे कठिन कैसे बनाएँ
रफ़्तार, व्यायाम की कठिनाई, कसरत या रिकवरी की अवधि अथवा राउंड की संख्या बदलकर सत्र को कठिन बनाया जा सकता है। सब कुछ एक साथ बदल देंगे तो यह पहचानना मुश्किल होगा कि सत्र को ज़रूरत से ज़्यादा कठिन किस चीज़ ने बनाया।
एक बार में एक ही चीज़ बदलें। समान इंटरवल रखते हुए एक राउंड जोड़ सकते हैं। किसी और दिन रफ़्तार बदले बिना कसरत की अवधि थोड़ी बढ़ा सकते हैं। समय वही रखकर किसी परिचित गतिविधि का थोड़ा कठिन रूप भी चुना जा सकता है।
हर कसरत का पिछली से कठिन होना ज़रूरी नहीं। नींद, अभ्यास से लंबा विराम, गर्मी और सामान्य थकान, सब आपकी स्थिति पर असर डालते हैं। कभी-कभी जानी-पहचानी योजना दोहराना या उसे आसान बनाना बेहतर होता है। कसरत का आकलन करते समय गतिविधि की गुणवत्ता, हर राउंड की निरंतरता और रिकवरी पर्याप्त थी या नहीं, इन बातों पर ध्यान दें।
इंटरवल ट्रेनिंग की आम गलतियाँ
पहला राउंड बहुत तेज़ शुरू करना। शुरुआत आसान लगती है, इसलिए ऐसी रफ़्तार चुन ली जाती है जिसे बनाए रखना मुश्किल होता है। पहली अवधि थोड़ी क्षमता बचाकर पूरी करें और ब्लॉक के आधे हिस्से के बाद तीव्रता फिर जाँचें।
घड़ी देखकर कठिन व्यायाम करना। तकनीक ठीक से सीखे बिना भी संकेत तेज़ चलने के लिए उकसाता है। ऐसी परिचित गतिविधियाँ चुनें जिन्हें लगातार निर्देश के बिना नियंत्रित कर सकें।
अलग-अलग व्यायामों के लिए एक ही योजना अपनाना। छोटी छलाँगें, चलना और अपने शरीर के भार से किए जाने वाले व्यायाम शरीर से अलग-अलग माँग रखते हैं। एक गतिविधि के लिए सही सेटिंग दूसरी पर फिट नहीं भी हो सकती।
वार्म-अप और कूल-डाउन छोड़ना। टाइमर अक्सर सीधे कसरत वाली स्क्रीन खोलता है, इसलिए तैयारी भूलना आसान है। सहेजी गई कसरत में इन्हें अलग चरण के रूप में जोड़ें या पहला राउंड शुरू करने से पहले वार्म-अप पूरा करें।
आराम को किसी तरह सबसे छोटा करने की कोशिश करना। छोटा विराम कठिन ज़रूर दिखता है, पर उससे कसरत हमेशा अधिक उपयोगी नहीं होती। रिकवरी बहुत कम हो तो अगली अवधियाँ थकान से लड़ने में निकलती हैं और गतिविधि की गुणवत्ता गिरती है।
शुरुआत के लिए सेटिंग
पहले सत्र में कोई परिचित व्यायाम चुनें और 20–30 सेकंड कसरत, उससे दोगुनी रिकवरी और 5–6 राउंड सेट करें। मध्यम गति रखें और ब्लॉक के अंत तक थोड़ी क्षमता बचाए रखें। बाद में लिखें कि किस राउंड में रफ़्तार बनाए रखना कठिन हुआ और हर विराम ने सँभलने के लिए पर्याप्त समय दिया या नहीं।
अगली सेटिंग चुनते समय इसी अनुभव का उपयोग करें। कसरत बहुत कठिन थी तो एक चीज़ आसान करें। हर राउंड स्थिर था तो योजना दोहराएँ या केवल एक चीज़ बदलें। इस तरह हर कसरत को सहनशक्ति की परीक्षा बनाए बिना कसरत और रिकवरी पर ठीक-ठीक नियंत्रण रखा जा सकता है।